नीलांजना?---(अन्तिम भाग)

सरोज वर्मा

नीलांजना?---(अन्तिम भाग)
(65)
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सारांश

सुखमती का ऐसा रूप देखकर, नीला का हृदय घृणा से भर गया, उसे लगा कि वो ऐसी मां की पुत्री है जो अपने स्वार्थ के लिए किसी की भी बलि दे सकती है, उसे बहुत बड़ा आघात लगा,उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया, ...
Arun Kumar Kashyap
आपकी कहानी पढ़कर अखंड भारत के महान राजा सम्राट अशोक का जीवन संघर्ष और उन संघर्षों का अंत याद आता है।। बहुत ही सुन्दर और रोचक रचना है धन्यवाद
Jay Gurjar
kash dono ek ho pate.overall nice story
Shobha Jain
bahut shandar kahani ant bada dukhd raha nilanjala ko uska pyar mil jana chahiye tha but sabhi ko sab kuchh nahi milta
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Pradip Sinha
nice one
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Kiran Singh
कहानी का अंत बहुत ही अच्छा हुआ सरोज
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ज्ञानेश्वरी द्विवेदी
बहुत सुंदर मार्मिक कहानी
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Rishabh Shukla
nice
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Savita Kushwaha
very nice collection of stories
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Karuna Tyagi
bahut sundar kahani
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Nisha Sori
ant bahut hi dukhd tha socha nhi tha is bare me , story bahut hi achhi hai .
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