निर्भया नहीं मिली…

विवेक मिश्र

निर्भया नहीं मिली…
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सारांश

लाल होते आसमान में दिन और रात दम साधे हुए खड़े थे और उनके बीच साँझ धीरे-धीरे वेदना जन रही थी। उसके खो जाने से बच्चों की सी रुलाई गले तक भरी आती थी… वह अक्सर ऐसे खेल खेला करती थी। कभी छुप जाती। कभी ...
Shalini Pandey
very heart touching story and very nice
अमित शर्मा
निशब्द कर दिया आपके इस लेख ने।
Rekha Jangra
रोगंटे खडे कर देने वाली कहानी, अद्भुत शैली हानी
minakshi
osm 👌👌
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Rasika Kulkarni
Very nice story really speechless
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Chanda Pandey
very emotional
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Shauvindra Singh
good wrote
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बरकत 'सहरा'
Speechless........
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Meena Bhatt.
दिल, दिमाक, शरीर की सभी इन्द्रीयों अनिभूति प्रदान करने वाली रचना मैं लेखक नहीं हूं ना इसलिए लिख नही पा रही।आप मेरे भावों को समक्ष सकते हैं शायद।बहुत ही उम्दा लेखन ढेर सारी शुभकामनाएं
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