नियति

दिव्या माथुर

नियति
(4)
पाठक संख्या − 226
पढ़िए

सारांश

नन्हा मुन्हा सा था जब वह ट्रेन चलाना चाहता था थोड़ा सा जो बड़ा हुआ उसे फ़ायर-फ़ाइटिंग का शौक़ चढ़ा सीढ़ी से गिर कर जब इन दिन फूटा सिर मेरा ख़ून बहा डाक्टर ही बनेगा अब तो वह विश्वास से भरकर उसने कहा ...
Uttam Kanwar
भावविभोर
Sumedha Prakash
मार्मिक रचना... दुःखद अभिव्यक्ति
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.