नासमझ लोग

Kumar durgesh Vikshipt *Vaishnav*

नासमझ लोग
(28)
पाठक संख्या − 87
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सारांश

कुमार दुर्गेश "विक्षिप्त" ( जब मैने पहली बार कलम उठाई तो कुछ इस तरह के विचार शब्दों को मैंने उकेरा... मेरी पहली कविता आप साहित्य प्रेमियों के साथ ... जिसे मैंने विद्यालय जीवन में लिखा..🙏) नासमझ ...
मोनिका
First poem.. Vo bi itni achhi.. Very nice.
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Vijay Singh
बहुत परिपक्व सोंच।
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योगेश
very true
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Ganga Datt Gawalra
पहली रचना जीवन की, बहुत अच्छी है
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Manisha Kadamshaikh
chan
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Dhanashri Jadhav
सही कहा है ,ईसी वझसे हमारा देश आगे नहि बढ पाता।
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Neelam Agarwal
अच्छी सत्य रचना
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सरोज वर्मा
बहुत सही बात कही है,, आपने
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