नारी के आंसु

Sushma Jain

नारी के आंसु
(8)
पाठक संख्या − 7
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सारांश

कौरव कंस और रावण के सामने, द्रौपदी देवकी और सीता के आंसु, किसी फायदे के लिए नहीं बहते। ये तो उनके अपमान दर्द और बेबसी की, कहानी है कहते। हाँ एक औरत रोती है। तब, जब उसके सम्मान को तार तार किया ...
Dharm Pal Singh Rawat
बहुत सुंदर।
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sushma gupta
अगर पीर आंखों से बह कर नहीं निकलेगी ..तो फिर वह ज्वाला बनकर निकलेगी जो संसार को जलाकर राख कर देगी ..इसलिए आंसू ही बेहतर है संसार की भलाई के लिए.. कोई इसे कमजोरी समझे या कायरता ..इससे स्त्रियों को फर्क नहीं पड़ता, बहुत बढ़िया लिखा है आपने💐👌💐👌💐👌
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Vinay Anand
बहुत खूब 👌
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Rajan Mishra
हृदय स्पर्शी रचना है आपकी बहुत ही खूबसूरत लिखा है आपने
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दुर्गा प्रसाद
बहुत खूब।👌👌👌👌7
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Krishna Khandelwal singla
बहोत जबर्दस्त शानदार रचना
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