नस्लीय, जातिगत और शोषणकारी पूंजीवाद के खिलाफ बिगुल है- फिल्म ‘काला’

Shyamkumar Hardaha

नस्लीय, जातिगत और शोषणकारी पूंजीवाद  के खिलाफ बिगुल है- फिल्म ‘काला’
(46)
पाठक संख्या − 119
पढ़िए

सारांश

फिल्म बताती है कि जमीन किसी सामंत या कॉरपोरेट की नहीं है बल्कि उन लोगों की है जिन्होंने इसे अपनी मेहनत से आजीविका और रहने लायक बनाया है. इस दृष्टि से यह धारावी की नहीं, बल्कि देश के उन सभी लोगों और विशेषकर आदिवासी समुदायों की कहानी है जो पिछले 300 सौ सालों से यह उद्घोष करते आ रहे हैं कि जल, जंगल, जमीन पर पहला हक उनका है.
Mayur Rangari
Badiya sir👍👍👍
रिप्लाय
Prashant Sukhadeve
प्रस्तुत लेख मे काला फिल्म की उचित समीक्षा की गयी है. भारतीय समाज मे नीचे जातीके लोगोंको अपमानित किया जाता है. उनकी परिस्थिती, भाषा, विवशता, गरिबी का मजाक उडाया जाता है. अपितु उचे जातीके लोग इसमे घमंड, अकड एवं गर्व महसूस करते हैं. यह बात उनकी घटिया सोच बताती है. लेखक ने इसे बहुत ही अच्छे तरीके से स्पष्ट किया है. लेखक ने इस समस्या की जड को धर्म मे बताया है, यह सच्चाई लेखक ने दर्षाया.
Tikaram Sahu 'aazad'
सदियों से हमारा देश धर्म- जाति के बंधनों में जकड़ा हुआ है। यह फ़िल्म इन बन्धनों को तोड़कर समतायुक्त समाज की स्थापना की पैरवी करता है। सभी आजादी की खुली हवा में सांस ले यही वक्त की मांग है। इसी बात को आपने प्रभावी ढंग से रेखांकित किया है।
Kailsh Dehariya
प्रचलन से हटकर नायक की जो जानदार शब्दों में आपने तारीफ की उसके लिए बधाई।
Rupali Khubalkar
अच्छी समीक्षा. फिल्म देखनी पड़ेगी
Yeshwant Gajbhiye
शानदार समीक्षा लिखी है सर.
Neha Sharma
प्रेरणादायक एवं भावपूर्ण लेख। हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं.................
Rahul Shete
Sahi hai आपका मत अच्छा लगा
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.