नया सबेरा

साधना सिंह

नया सबेरा
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सारांश

दिन भर मेहमानों की आवाजाही , ऊपर से रात से तबीयत खराब थी भारती की.. फिर भी कोई कोताही नही बरती खातिरदारी मे । सुबह का नाश्ता, दोपहर का लंच और रात का डिनर.. कमर मानो टुट ही गयी थी । आखिरकार मेहमान गये ...
Seema Thakur
चलो भारती ने कहने की हिम्मत तो की।
Ghanshyam Batham
सुंदर रचना।
Nitin Verma
👌👌sahi pakde hai
Ankita Dewan
beautiful..bahut accha kiya bharti ne..agar apan haq paana hai toh koi kadam toh uthana hi padega..
लखन छाबड़ा
सुन्दर लेखन, अच्छी कहानी
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