नमी आँखों की कहती है,

डॉ.सबा युनुस

नमी आँखों की  कहती है,
(74)
पाठक संख्या − 2872
पढ़िए

सारांश

नमी आँखों की कहती है,मुझे तुम याद आते हो,टूटती साँस कहती है,मुझे तुम याद आते हो,कभी जो तन्हा बैठूं दो घड़ी,दुनिया से छुप के मैं , तो ,फिसलती ज़िन्दगी कहती है,बहुत तुम याद आते हो।
Satpal. Singh Jattan
very beautiful thoughts.pls. read my creations
सरिता सन्धु
बढ़िया रचना है
Sunil Shukla
बहुत सुंदर बहुत खूब लिखा है आपने 🌼🌼🌼🌼
sachin Jain Aman
बहर में कहें और थोडा शब्द विन्यास का खयाल रखें तो अच्छी रचनायें लिखने की सम्भावना है।
Ravindra Narayan Pahalwan
बहुत सुंदर...
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.