नकाब

amit verma

नकाब
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सारांश

मुश्किल बस इतनी है मुझे जताना नही आता, इल्ज़ाम ये लगा है कि मुझे निभाना नहीं आता, मिल्कियत मेरी भी बन जाती,औरों की तरह, यूँ लूटकर अपनों को,मुझे कमाना नही आता, वक़्त अभी बाकी है, कुछ कर गुज़रना ...
इकबाल अमरोही
मित्र सबसे पहले तो आपको सावन सोमवार की हार्दिक बधाई, ,, किन शब्दो से आपको अधिक प्रसनता होगी, जय श्री राम, हर हर महा देव, वन्दे मातरम, भारत माता की जय, जय बजरंग बली, या कुछ और ,,,इन शब्दों से मुझे कोई आपत्ति नही है,, हा भले ही आप बदले में ,,, पाकिस्तानी, देशद्रोही, कटवा, मुल्ले,,, और भी आपत्तिजनक शब्दो से पुकार सकते है,, मैं बिल्कुल भी बुरा नही है,,,आपने जो कुछ कहा उसमे सत्ता लोभ है ,,,आप राजनीति में कोई पद पाना चाहते है ऐसी टिप्पणी करके तो समझ आता है, लेकिन इसे हिन्दू धर्म से ना जोड़े,, क्योंकि एक हिन्दू की इतनी घटिया मानसकिता नही होती,, अंत में एक ही बात कहना चाहूंगा,, की सूर्य दिन भर अपनी तपिश से हाहाकार क्यों ना मचा ले लेकिन एक समय ऐसा आता है कि उसे भी अस्त होना पड़ता है,,फिर ये सरकार जिस के दम पर आप में इतना साहस आया वो क्या चीज़ है,,यही संसार का नियम है कुछ भी सदैव नही रहता ,,, समय एक जैसा नही रहता है कभी भी,,, आज आपका है कल किसी और का होगा,, इसलिए ऐसी अज्ञानी वाली करके अपना धर्म को बदनाम ना करे।।,,, जय श्री राम🙏🙏🙏🙏🇮🇳🇮🇳🇮🇳 आप बदले में मुझे जो कहना चाहे कह सकते है,, मेरे मन मे आपके लिए ज़रा भी द्वेष नही आएगा ,, ☺️☺️☺️
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