नई सुबह

बसंती पंवार

नई सुबह
(5)
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सारांश

रोते-रोते रजनी को पता ही नहीं चला कि वो कब नींद की आगोष में चली गई । उसे तो बस इतना याद रहा कि सूरज उसे प्यार से एक मां की तरह सुला रहा था , उसकी ऑंखों में भी ऑंसू थे । रो लेने व सूरज के प्यार भरे ...
Shiven Singh
काफी सच्चाई से पूर्ण है यह कहानी सच्चे प्यार हर किसी को नहीं मिलता
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