धोधाबाई की कथा

रचना व्यास

धोधाबाई की कथा
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सारांश

"इस बार श्राद्धपक्ष में पिण्डदान करने काफी लोग गयातीर्थ जा रहे है। सोचता हूँ मैं भी अपने पितरों को तृप्त कर ही दूं। " चतुरसिहं ने मालती को अपनी मशां बताई। "वाह ! पन्द्रह दिन तक इनके पीछे से खूब ...
Khan Farhan
wah wah bahoot din pehle mene ye khani suni thi or aaj padh li mza aa gya
Raja Pandit
bahut badhiya maza aaya kahani padh kr
Babita
horror to nhi thi per achi thi enjoy kiya
Sarika Yadav
bht hi achi kahani h
Manju Thakur
अच्छी कहानी थी बीच बीच में रजिस्थानी भाषा का प्रयोग बहुत अच्छा लगा
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