धोखा

मुंशी प्रेमचंद

धोखा
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सारांश

सतीकुण्ड में खिले हुए कमल वसंत के धीमे-धीमे झोंकों से लहरा रहे थे और प्रातःकाल की मंद-मंद सुनहरी किरणें उनसे मिल-मिल कर मुस्कराती थीं। राजकुमारी प्रभा कुण्ड के किनारे हरी-हरी घास पर खड़ी सुन्दर ...
suman kumari
kuch na Kahane Yog Ek Mahan lekhak ki Mahan Kalakriti Jo aaj ki kahaniyon mein nahi milti
Krishna Tiwari
समिक्षा करना सूरज को दीया दिखने जैसा....
Jitendra Chaudhary
kahani atiutam language Hard hai jisse kahi kahi Man kahani se hat raha tha
upma
jitni tarif ki jaye km jai
anil kumar
अत्यंत सराहनीय
kanchan balla
kash es modernity ma bi asa pram hota really hurt touched story wonderful
Akanksha Dikshit
हम लोग मुन्शी जी की कथाओं की समीक्षा के योग्य नही है।फिर भी अप्रतिम
vijaya sharma
sdi k Mahantam SAHITYAKAR Ki bhi koi tulna ki ja sakti h bhala... Namumkin 🤗
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