धोखा

मुंशी प्रेमचंद

धोखा
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सारांश

सतीकुण्ड में खिले हुए कमल वसंत के धीमे-धीमे झोंकों से लहरा रहे थे और प्रातःकाल की मंद-मंद सुनहरी किरणें उनसे मिल-मिल कर मुस्कराती थीं। राजकुमारी प्रभा कुण्ड के किनारे हरी-हरी घास पर खड़ी सुन्दर पक्षिय
अशोक कुमार खत्री
समर्पण ही प्रेम की नींव है।
Daya Ram
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अनिल कुमार
अद्भुत मुन्शी जी
Vivek Thape
बहुत अच्छी
Swarn Lata
Aatma ko pavitr kar dene wali kahani
Ravi Sinha
निःशब्द
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