धुआं

उद्भ्रांत

धुआं
(48)
पाठक संख्या − 7408
पढ़िए

सारांश

सीढि़यां पार कर वह ऊपर पहुँचा तो दूर से ही अम्मा की झलक दिखाई दे गई। वहीं से वह चिल्लाया, ‘‘अम्मा, राम.राम!’’ अम्मा का झुर्रियों से भरा चेहरा ऊपर उठा। ‘‘कौन मुकुल है क्या?’’ और उसके साथ ही एक मीठी ...
Jyoti Rishi
Maa ka dard koi nahi samajh sakta
गोविंद सिंह वर्मा
बहुत बढ़िया कहानी है ।
Reema Bhadauria
Bahut sunder story 😊😊
सोमेश कुमार
MAAN KA DIL USE KRTVY AUR BEBSI KI SUNDER KTHA
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.