धुंध

अनामिका चक्रवर्ती

धुंध
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सारांश

गहरे नीले बार्डर वाली आसमानी रंग की सिल्क की साड़ी को सहलाते हुए मन भी आजपूरा नीले आसमान की तरह खिला सा था।आज बहुत साल बाद पहनूँगी फिर इस साड़ी को।अपने मन ही मन कहते हुए वक़्त के पुराने दराज़ में चली ...
Anand Parkash Aggarwal
कभी-कभी जीवन में ऐसे मोड़ आ जातें हैं कि हम चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते हैं। समय बहुत बलवान होता है। रिस्ते बनाना आसान है। पर निभाना उतना ही कठिन काम है। बहुत ही सुंदर कहानी
DrDiwakar Sharma
केवल धुन्ध ही धुन्ध. कोई पात्र स्पष्ट नहीं सिवाय काकी और माया के।दोनों पुरुष पात्रों का किरदार निहायत गैर जिम्मेदाराना या कहें तो घिनौना. सा है।सच कहाजाए तो वित्रष्णा से भरा हुआ है।कथानक अच्छा. है ।कहानी शायद और दमदार हो सकती थीः
Puja Kedia
story smjh m nhe aayi sakat na antra sa shaadi krka Maya Ko Dhoka diya nd Maya ki maa Ko Saket nd Maya k rishta sa ky prblm tha ya v mentn nhe h unko khud he Ketan nd Maya ki shaadi krwani chahiya thi nd Saket pyaar krta tha Maya sa toh apni zindagi m kaisa kisi Ko jagh da diya story clr bilkul nhe h
Kopal Gupta
nice story , 💓 touching story
Ankita Srivastava
बहुत ही सुन्दर रचना.
उमा  झुनझुनवाला
बहुत खूबसूरत कहानी... धारा प्रवाह बहती...द्वंद्वात्मक विकास के साथ...अनामिका को साधुवाद ❤️❤️
सुनील भारद्वाज
रिश्तों और प्रेम की धुन्ध में लिपटी एक सुन्दर कहानी, हर पात्र चाह कर भी अपने मन की बात को मन में दबाकर रह जाता है शायद सामाजिक दबावों के चलते....कथानक की निरंतरता कहानी को पढ़ने की उत्सुकता बनाये रखती है और पाठक को बाँधकर.... बहुत सुन्दर।
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