धुंध

अनामिका चक्रवर्ती

धुंध
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सारांश

गहरे नीले बार्डर वाली आसमानी रंग की सिल्क की साड़ी को सहलाते हुए मन भी आजपूरा नीले आसमान की तरह खिला सा था।आज बहुत साल बाद पहनूँगी फिर इस साड़ी को।अपने मन ही मन कहते हुए वक़्त के पुराने दराज़ में चली
Kopal Gupta
nice story , 💓 touching story
Ankita Srivastava
बहुत ही सुन्दर रचना.
उमा  झुनझुनवाला
बहुत खूबसूरत कहानी... धारा प्रवाह बहती...द्वंद्वात्मक विकास के साथ...अनामिका को साधुवाद ❤️❤️
सुनील भारद्वाज
रिश्तों और प्रेम की धुन्ध में लिपटी एक सुन्दर कहानी, हर पात्र चाह कर भी अपने मन की बात को मन में दबाकर रह जाता है शायद सामाजिक दबावों के चलते....कथानक की निरंतरता कहानी को पढ़ने की उत्सुकता बनाये रखती है और पाठक को बाँधकर.... बहुत सुन्दर।
आशा सिंह
बहुत सुंदर
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Raj Sharma
साकेत नही मैं पागल होना नही चाहती तुम लौट आओ " बहुत अच्छी कहानी
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