धुंध

अनामिका चक्रवर्ती

धुंध
(45)
पाठक संख्या − 299
पढ़िए
Shailesh Jain
बेहतरीन कृति
Rajendra Singh Gahlot
कहानी मे कविता झलकती है निश्चित ही कहानीकार एक सफल कवियत्री होगी कहानी आत्ममंथन अतीत और वर्तमान केबीच भावनाओ के शैलाब मे डूबती उतराती है कही कही कहानी सपाटबयानी की भी शिकार है
Gaurav Sinha
बहुत ही अच्छा कहानी है
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Manju Sinha
bahut hi acchi kahani
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Suresh Tailor
एक ऐसी कहानी जो पढ़ने वाले को खुद किरदार बना दे...!! दिल के हर कोने को स्पर्श करती एक बेहतरीन कहानी..!!!
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Bono Gopal Bhattacharjee
बहुत ही हृदय स्पर्शी। शिर्षक '' धुंध'' बिलकुल सठीक
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Sunil Bhai
बहुत ही उम्दा,कहानी इसी तरह होनी चाहिए,सरलता के साथ असीमित गहराई,बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं,
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Ashwini Tyagi
अपने साथ ले चलती है कहानी ! रोचकता सरलता इसकी विशिष्टता है ! बहुत अच्छी लगी ☺️ शुभकामनाएं~ बधाई !!
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Richa Vimal
निर्बाध गति से बहती हुई नदी सी सुंदर कहानी। कथानक का सुंदर प्रस्तुति करण किया गया है। अतीत से वर्तमान तक की यात्रा में क़ई हृदयस्पर्शी मोड़ आते हैं और मर्मस्पर्शी अंत के साथ ये कहानी पाठकों को बांधे रहती है। बेहद सुंदर कहानी।
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मुख़्तसर सी बात है
बहुत अच्छी लगी कहानी
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