दो बाँहें, एक गंध और ख़ालिस रोमांस

रजनी मोरवाल

दो बाँहें, एक गंध और ख़ालिस रोमांस
(200)
पाठक संख्या − 23430
पढ़िए
Vandana Prasad
behad Shaandar aur khoobsurat Rachna.....ma'am
Ritika Singh
बेहतरीन
नृपेंद्र शर्मा
बहुत खिबसूरती से गढ़ा आपने दोनो किरदारों को। बहुत उम्दा कहानी
Munish Saxena
बहुत अच्छा लेकिन अंत में कुछ कमी रह गई है।
Annasaheb Dalal
शब्दो की कसावट लाजवाब है।।छोटी कहानी लेकीन बहुत कुछ कह जाती है।। कब खत्म हो गई मालुम ही नही पडा।। शानदार अभिव्यक्ती और अहसास।।
Mohd Najim Id
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Prafull Bhatnagar
आकार कुछ छोटा होता तो और प्रभावी हो सकती थी
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