दो बाँहें, एक गंध और ख़ालिस रोमांस

रजनी मोरवाल

दो बाँहें, एक गंध और ख़ालिस रोमांस
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Annasaheb Dalal
शब्दो की कसावट लाजवाब है।।छोटी कहानी लेकीन बहुत कुछ कह जाती है।। कब खत्म हो गई मालुम ही नही पडा।। शानदार अभिव्यक्ती और अहसास।।
Mohd Najim Id
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आकार कुछ छोटा होता तो और प्रभावी हो सकती थी
नृपेंद्र शर्मा
बहुत खिबसूरती से गढ़ा आपने दोनो किरदारों को। बहुत उम्दा कहानी
डा.अविनाश झा
कथा शिल्प बेहतरीन! कहने की शैली भी लाजवाब!
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