दो दिल

निजा

दो दिल
(107)
पाठक संख्या − 33900
पढ़िए

सारांश

डिंग .. डाँग .... - "ओह ..शीट !! उठाओ ये कपड़े और भागो यहाँ से ... उफ्फ्फ .. जल्दी करो .. " दीप्ती ने अपने बालों और सलवार को तेजी से ठीक करते हुए कहा। "इसीलिए मैं तुम्हें मेरे घर आने से मना करती रही, ...
Archana Yadav
kahaani poori kaise padhe.......adhoori h
Kanta Asopa
khani choti thee samjh mai kam aaye
Deepak Shukla
अपूर्ण अहसास ।
Veer Sharma
पूरी है ये कहानी!!!
Aman Khan
बहोत ही खूबसूरत रचना है उम्मीद करता हु आगे की कहानि और अछी होगी
Satpal. Singh Jattan
kahani ka sar pair nhi h ji.aap kya chahti hn.? smjh nhi paya
વિજયકુમાર
इतनी ही कहानी है या आगेभी....
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.