दो दिल

निजा

दो दिल
(80)
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सारांश

डिंग .. डाँग ....- "ओह ..शीट !! उठाओ ये कपड़े और भागो यहाँ से ... उफ्फ्फ .. जल्दी करो .. " दीप्ती ने अपने बालों और सलवार को तेजी से ठीक करते हुए कहा। "इसीलिए मैं तुम्हें मेरे घर आने से मना करती रही, इस
Aman Khan
बहोत ही खूबसूरत रचना है उम्मीद करता हु आगे की कहानि और अछी होगी
Satpal. Singh Jattan
kahani ka sar pair nhi h ji.aap kya chahti hn.? smjh nhi paya
વિજયકુમાર
इतनी ही कहानी है या आगेभी....
Renu Vijh
सिर्फ इतने से कहानी का मर्म स्पष्ट नही हो रहा
Nisha Aiya
कहानी का अंत कुछ confusing लगा ।🤔
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