दो जिन्दा लाशें

जयति जैन "नूतन"

दो जिन्दा लाशें
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सारांश

आधी रात को जब नीतू से बात हुई सोनू की तो अतीत की यादो ने उसे घेर लिया ! उसने खुद को बहुत सम्भाला लेकिन समझा नहीं पाया खुद को ! वापिस से नीतू को फोन नहीं करना चाहता था वह ! नींद की गोली खाने को वो पुरानी अलमारी खोलता है तो उसे नीतू की दी हुई डायरी हाथ लगती है जिसके कई पन्नो मे दोनों की तस्वीर लगी हुई थी ! ना जाने क्या हुआ और वो रात 3 बजे पुराने किस्से लिखने बैठता है, वो आज हर वो बात लिख देना चाहता है जो उसके दिमाग मे थी... शीर्षक डालता है- अतीत का एक दौर वो एक दौर ही था जब सोनू और नीतू एक दूसरे से बेपनाह मोहब्वत करते थे, एक दूसरे से बात किये बिना ना दिन होता था ना रात ! रोज़ दिन मे 2-3 बार फोन पर बात होना साधारण बात हो गयी थी ! आज यादे इतनी दिलचप्स हैं कि सोचने बैठो तो समय का पता ही नहीं चलता ! कल ही की बात हो जेसे .........
Dinesh Saini
इब्तिदा-ए-इश्क है, रोता है क्या, आगे-आगे देखिए, होता है क्या ||
Ritesh Surana
प्रेम गली अति सांकरी जामे दो न समाय और जब इसमें दो के लिए ही जगह नहीं होती तो फिर किसी तीसरे की आने पर तो यही अंजाम होगा और अगर प्यार को संपूर्ण करना है तो दो को भी एक ही होना पड़ेगा तब प्यार संपूर्ण होगा मगर इसकी एक ही शर्त है पवित्रता और पूर्णता
Narayan Dutt Pandey
Nice story... Never forget my real love..
sonu saini
Bahut hi Umda, Real Story
Runa Agarwal
meva ek padhi likhi naukri shuda ladki thi ..uska pati shakki tha iske baad b usne apne pati ko ek mauka diya apni bhul smjhne ka lekin wo is rishte me nakaam rahi ..lekin iska mtlb ye nahi k wo apni jaan de de.use apne pati se talaq lena chahiye tha na ki maut ko gale lagana ..
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Late Mrs. Aakansha Mishra
उम्दा बहुत ही सुंदर रचना
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