दो घूँट पानी

राजेश रस्तोगी

दो घूँट पानी
(39)
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सारांश

छोडो़, जाने दो , इस बहस को , कौन कितना सहाय असहाय है अन्दर ही अन्दर हमसब जानते हैं बस झिझकते है सत्य की स्वीकारोक्ति से.....बात केवल नारी -नर की नही ,दोनों ही अपने आपको अधिक समर्थ समझते हैं फिर भी एक दूसरे के सहारे की अपेक्षा रखते हैं विवाह शायद इसी जरूरत के समझौते का दूसरा नाम है.....
Neelima Ghosh
ak vidhava stri ki vyatha katha, bahut achhi kahani....sachhai ke nikat...
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Ashok Sharma
इस कहानी में आपने बहुत गहरी समस्या का चित्रण किया और ये सही है नारी को पिता पुत्र भाई किसी रूप में पुरुष का साथ चाहिए महिला उस लता के सामान बिना सहारे सीधी कड़ी नहीं हो सकती -धन्यवाद
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Kiran Bisht
बकवास
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Jainendra Kashyap
Very nice depiction of life.
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Chanchal Jadon
Bahut khoobsurat.👌
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Anju Vishnoi
सही चित्रण
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Dr Kamal Satyarthi
Beautiful
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C.K Chandna
bahut achi kahani. Esme aapne ek khudar estri Ka jo Chitran Keya ha, wo kaabile taarif ha Lekin dusre pahlu me jo puurush ke vaasna Drishti kaa ullekh Keya. aapne aaj ke samaaj kaa vaastawik ayena dekha Deya ha.aapko thanks.
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Reema Bhadauria
है तो भयानक सच पर इसे भयानक बनाता कौन है पुरूष समाज ही ।बहुत खूबसूरत कहानी 😯😯
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Abha Raizada
kadva aur bhayanak satya
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