दो कश

Deepak SINGLA

दो कश
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सारांश

धूम्रपान एक मीठा "जहर" जो सिर्फ तड़फने के लिए ज़िंदा छोड़ देता है।
Pawan Pandey
अविश्वसनीय प्रतीत होता है। पात्र पुरुष हो सकते थे।
Poonam Juneja
Sorry but cant understand the story
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Archana Singh
आज के समाज की सच्चाई यही है
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अचलेश सिंह
जी बिल्कुल सही है किसी चीज को लत नहीं बनाना चाहिए ।किन्तु रानी की समस्या का कारण केवल धूम्रपान ही नहीं था मैंने जहां तक किरदार को समझा मुझे तो मानसिक रोगी लगी,,,ये केवल मेरे विचार हैं ।
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नृपेन्द्र शर्मा
बहुत सुंदरता से शब्द दिए एक चित्र को।
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योगी योगेन्द्र
बहुत सुंदर एक सामाजिक चेतावनी उस जहर के प्रति जो समाज मे बढ़ता ही जा रहा है
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उर्मिला तिवारी उर्मिला
हार्दिक बधाई बहुत सूंदर
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ईश्वर सिंह बिष्ट
हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ आपको । वास्तविकता । जीवन का निर्मम लेकिन कटु सत्य ।
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