दोस्ती थी प्यार था या कुछ और एहसासों का रिश्ता

खुशबु जैन

दोस्ती थी प्यार था या कुछ और एहसासों का रिश्ता
(226)
पाठक संख्या − 34630
पढ़िए
Madhuri Soni
aisa hota hai, ap chah k bhi samne wale ko a0ne dil ki bat kah nhi skte,...sirf dost banke rah skte hai.☺️
Javed Ali
कहानी अच्छी है पर कहानी का अंत कुछ अधूरा सा लगा ending और बेहतरीन हो सकती थी पर कोशिश अच्छी थी Best of luck.
बृजभूषण खरे
शानदार प्रस्तुति. पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.
Sarita Mishra
अंत कुछ अधूरा से लगा । जिस वजह से न मिलने का प्रण किया .... वह पूरी हुई कि नहीं ,उत्सुकता बनी रहती है ।
Archana Pareek
मेरी ही कहानी लिखी हो जैसे. बहुत बढिया
Shivangi gupta
thoda sa story ko or badha deti to accha hota... par fir b it's nice....
Arti Sengar
आपकी कहानी बहुत अच्छी है लेकिन आज कल कहाँ मिलते हैं ऐसे लोग जो स्वार्थी ना हो
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.