दोस्ती थी प्यार था या कुछ और एहसासों का रिश्ता

खुशबु जैन

दोस्ती थी प्यार था या कुछ और एहसासों का रिश्ता
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बृजभूषण खरे
शानदार प्रस्तुति. पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.
Sarita Mishra
अंत कुछ अधूरा से लगा । जिस वजह से न मिलने का प्रण किया .... वह पूरी हुई कि नहीं ,उत्सुकता बनी रहती है ।
Archana Pareek
मेरी ही कहानी लिखी हो जैसे. बहुत बढिया
Shivangi gupta
thoda sa story ko or badha deti to accha hota... par fir b it's nice....
Arti Sengar
आपकी कहानी बहुत अच्छी है लेकिन आज कल कहाँ मिलते हैं ऐसे लोग जो स्वार्थी ना हो
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