देवी हूँ मैं #ओ वुमनिया

Vandana Prasad

देवी हूँ मैं #ओ वुमनिया
(35)
पाठक संख्या − 93
पढ़िए

सारांश

देवी हूंँ मैं, सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गा, काली और चंडी हूं मैं , पूजी जाती मंदिर मंदिर, सृष्टि की आधार हूंँ मैं। परंतु, जब मैं आई तेरे धाम, बनकर तेरी ही प्रतिकृती, तब मन में भरकर अमर्ष, तूने किया ...
kuldeep singh
नमन दवी रुप को । सुंदर प्रस्तुति।
Gyanendra maddheshia Gyani
बेहतरीन शब्द और उसका चयन आपकी रचनात्मक क्षमता की पूर्णता को दिखाता है।वाक़ई में आपने नारी की समस्त शक्तियों के साथ उसके ओज को प्रकट किया है.....तारीफ के काबिल है आपकी कविता मैम
रिप्लाय
अमिताभ कुमार
उत्तम अभिव्यक्ति........
रिप्लाय
शैलेश सिंह
एक एक पंक्ति लाजवाब,,,नमन तुम्हे हे देवी,,, बहुत ही उम्दा सोच के साथ लिखी गयी रचना।।
रिप्लाय
Jiwan Sameer
गहरी संवेदना लिए हुए सुंदर सशक्त सृजन
रिप्लाय
Kumar Gupta
उत्कृष्ट रचना , नारी सम्मान में ..।।
प्रगति सिंह
प्रभावशाली रचना , बेहतरीन👌
रिप्लाय
Kishor Vala
devi hoo me .....👍👍👍
shakuntla shaku
बहुत सुंदर चित्रण
Vijaykant Verma
स्त्री की मनोदशा का सुंदर चित्रण..! बहुत खूब..💐💐
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.