दुलहिन

कुमार गौरव

दुलहिन
(63)
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सारांश

मदना की नजरें दुलहिन से मिलती है तो वो सर झुका लिए । दुलहिन घृणा से उसके मुंह पर थूक देती है । झपटकर उसके ऑटो से पोंपों खोलकर मदना के हाथ में पकड़ा देती है और हिकारत से कहती है "बजा इसको अब क्यों नहीं बजाता मेरी जिंदगी के राज तो भोंपा लगाकर सुना आया । " मदना सिर झुकाये सफाई दे रहा है " वो पिछले हफ्ते दलसिंहसराय गया था ताड़ीखाने देखा तो तलब लग गई वहीं शायद । " दुलहिन ने आँखों से अंगारे बरसाये " तू चाहता की गाँव में न रहें तो कह देता यूं फजीहत कराने की जरूरत क्या थी । " उधर रज्जाक पूरे गाँव के सामने वोटर आईडी और आधार कार्ड लहरा रहा है सबूत के तौर पर । मदना पोंपों लेकर टेम्पो पर चढ़ गया और बजाकर सबका ध्यानाकर्षण करते हुए चिल्लाया "इस सबसे कुछ न होगा असल है तो निकाहनामा दिखाओ । "
Ritu Roy
vaakai mja aa gya
Milan Gupta
😂😂 bechara bina glti ke pit gya😃 nice story
Hem Lata Tiwari
रचना बहुत परिपक्व है।विषय लीक से हट कर है, बधाई।
Maanvik Rawat
सही है है जितने जमात नहीं पढ़े उससे ज्यादा निकाह पढ़े हैं।
ShrUti DubEy
2 बार पढ़े तब समझे पूरी कहानी, पर मज़ा आ गया।। 😍😍😍😍😅
Satpal. Singh Jattan
very nice and unique story
Dëēpåk Jhä
लगता है कि प्रेमचंद से inspiration लिये हो आप..😂 कहानी काफी अच्छी है....
Itika Soni
बेचारा फोकट में पिट गया
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