दुक्खम्‌-सुक्खम्‌

ममता कालिया

दुक्खम्‌-सुक्खम्‌
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सारांश

उसके जन्म में ऐसी कोई असाधारण बात नहीं थी कि उसका जिक्र इतिहास अथवा समाजविज्ञान की पुस्तकों में पाया जाता। जिस दिन वह पैदा हुई, घर में कोई उत्सव नहीं मना, लड्डू नहीं बँटे, बधावा नहीं बजा। उलटे घर की ...
हेमंत यादव
मैने ये पुरा उपन्यास पढा़ है मैम आपका...लेकिन थोड़ा अधुरापन सा लगा
Deepti Deepika
aapki katha adhuri hai.. ise gatank se aage badhayen
Shalini Tripathi
बहुत ही सजीव चित्रण ,लगा सब कुछ आंखो के सामने हुआ है,धन्य वाद मैम
Pushplata Kushwaha
very natural and heart touching story of a middle class family very good description of mother in law and daughter in law relationships it is very real that's why new generations don't want to live in joint family. end of the story is to some extent missing something. on the story is real life story
Manju Lata Gola
कहानी के अंत ने बहुत जयादा निराश किया एक मधयम परिवार को लेकर बुनी गई लेकिन न कोई सन्देश न कोई और विशेषता बहुत ही मनोयोग से पढती गई किन्तु ठगा सा महसूस कर रही हूं पांच सितारे कहानी की बुनावट के लिए ।
Pragya Shrivastava
accha bura jesa bhi ho par har kahani ka ek ant hona jaruri hai. last me disappointed hui
Davinder Kumar
आपका प्रयास बहुत अच्छा और संवेदनशील है
प्रज्ञा शिवा
bahut sudhar ki aavashyakta hai.....padhte samay baar baar page aage adh jata hai.....jise page no daalkar vaapas laa bhi nahi sakte
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