दिशा विहीन रिश्ते

एस.भाग्यम शर्मा

दिशा विहीन रिश्ते
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सारांश

घी की खूशबू धीरे-धीरे रसोई में से बाहर आकर पूरे घर मे ंफैल गई। पूर्णिमा पसीने को पोछते हुए बैठक में आकर बैठ गई। ‘‘क्या बात है पूर्णि बहुत बढ़िया-बढिया पकवान बन रही हो.... काम खतम हो गया है या कुछ और ...
Kamlesh Patni
समय बहुत बलवान होता है।आजकल शादी के बाद सब घरों की यही स्थिती है ।सब स्वतंत्रत रहना चाहते हैं।मुसीबत में फिर अपनों की याद आती है।उस समय याद आती है उनकी नि स्वार्थ सेवा की।तब तक बहुत देर हो जाती है।पूर्णिमा ने बिल्कुल सही किया।
Abhilasha
kamaal ki kahani h
Baljeet Kaur
अंत बहुत ही शानदार था 👌👌👏👏
shradha
बोहोत हि अच्छी कहानी है।
Usha Thayya
दिल को छू लेने वाली रचना
ashish singh
bahut Sahi likha he mam aapne. yahi vyatha he samaj ki. ma bap ko bojh samjhne lage he bacche
Rashmi
अति सुंदर रचना , जो प्रेम समझ न पाए उनको ऐसे ही सबक सीखना चाहिए फिर चाहे वो कोई भी रिश्ता क्यों न हो ।
Varun Aggarwal
very very nice teak kiya
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