दिशा विहीन रिश्ते

एस.भाग्यम शर्मा

दिशा विहीन रिश्ते
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सारांश

घी की खूशबू धीरे-धीरे रसोई में से बाहर आकर पूरे घर मे ंफैल गई। पूर्णिमा पसीने को पोछते हुए बैठक में आकर बैठ गई। ‘‘क्या बात है पूर्णि बहुत बढ़िया-बढिया पकवान बन रही हो.... काम खतम हो गया है या कुछ और ...
Sandhya Sandy
bahut acha aise baccho ke sath Aisa hi karna chiye
arpan
यथार्थ चित्रण
Meena Bhatt.
लाजवाब👌👌👌👌👌👌👌👌👌
Sarita Sahni
स्वार्थी बहु
ShashiNigam
achhi kahani hae bahut kuchh sikhane ko mila
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