दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 2

दिनेश दिवाकर

दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 2
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सारांश

मैं बस से उतरने ही वाला था कि किसी ने मुझे धक्का दिया मैं निचे गिर पड़ा, मैं पिछे मुडकर देखा तो वहां कोई नहीं था तभी उस बस को एक ट्रक ने टक्कर मारा और वह बस खाई में जा गिरा मैं सोच रहा था कि उसने मुझे बचाया या
रोशन कुमार सिंह
बहुत सुंदर कहानी
Ikshita Sînghaniya
very good
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एकांत
अब यह कहानी मुझे Final Destination की याद दिला रही है। साथ ही एक वैज्ञानिक तथ्य बता देता हूँ: हम मनुष्य खुद स्वयं का दम नही घोट सकते। क्योंकि जब हमे ऑक्सिजन मिलना बंद हो जाता हैं तो हम बेहोश हो जाते है, और बेहोशी की हालत मे हम दुबारा सास लेने लग जाते है जिस कारण हम जीवित बच जाते है। अब आते है मुद्दे पर। प्रेम के बाथरूम मे खून भर गया था और वह उसमे डूब गया था जिस कारण वह सास नही ले पा रहा था और बेहोश हो गया। ऐसे मे बेहोशी की हालत मे उसे खून या जो भी वह द्रव्य था, उसे अपने फेफड़ो मे ले लेना चाहिए था, पर फिर फेफड़ो मे द्रव्य भरने से जान भी चली जाती है। तो वह खून या द्रव्य प्रेम के फेफड़ो मे क्यों नही भरा? अब जो भी प्रेम की रक्षा कर रहा है या कर रही है, क्या उसने प्रेम को CPR भी दिया था और उसके फेफड़ो से वह द्रव्य भी निकाला था क्या? इस चीज़ को स्पष्ट करे। फंतासी है तो इसका यह अर्थ नही की कुछ भी लिखोगे।
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