दिल

मनमोहन भाटिया

दिल
(132)
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सारांश

वातानुकूलित दफ्तर में 20 डिग्री तापमान में ओम चड्ढा को पसीने छूटने लगे। ओम चड्ढा बेचैनी महसूस करने लगे। कुछ गड़बड़ है। फ़ोन पर सेक्रेटरी को बुलाया। सेक्रेटरी फौरन केबिन में उपस्थित हो गया। "जी सर।" ...
Aashu Jain
Nice... 👌
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Amrendra Kumar
Nice story
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संतोष नायक
रिश्तों में दूरी/मनमुटाव पैदा हो जाना मानवीय कमजोरी/भूल मानी जाती है लेकिन रिश्ता खत्म नहीं होता है ,वह किसी न किसी रूप में बना रहता है। ओम चड्ढा के रूप में दोनों ही रूप नजर आते है।इसका सारा श्रेय आपकी कुशल लेखन शैली के साथ साथ अद्भुत कल्पनाशीलता को जाता है। कहानी बहुत बहुत पसंद आई।
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sudha tiwari
बहुत अच्छी कहानी
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Rajeev Srivastava
भूल सुधार
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Swarn Lata Purohit
nice story👏👏👌👌👌👌👌👌,jb jage tbhi savera
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Dr Deepayan Choudhury
सुखद अंत ,अच्छा लगा पढ़कर
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Aaditya Aadi
Kahani acchi hone ke sath bahut kuch Sikh bhi de gyi
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Sudha Singh
ncy story
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सुभाष कैम
ह्रदय स्पर्श करके आँखे भी नम कर दी।
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