दिल ही दिल में

और्व विशाल

दिल ही दिल में
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सारांश

दिल ही दिल मे, दिल लिया दिल ने..! दिल को क्या पता था , उस दिल मे चोर था ! दिल लगाया हमने , और तोडा था तुमने , पहले ही कह देती ना , तेरे दिल में कोई और था...। ◇◇◇◇◇◇◇◇◇◇ मेरा ...
Rajan Mishra
बहुत सुंदर अच्छी रचना है
R.K shrivastava
दिल ही तो दिल है । दिल के सिवाय दिल और कुछ नहीं है । जो है दिल में ही है, जो बाहर आयेगा दिल से ही बाहर आयेगा ! बहुत खूब !!
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