दिल बहलाव

पंडित बाल कृष्ण भट्ट

दिल बहलाव
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सारांश

एक पंडित जी अपने लड़के को पढ़ा रहे थे 'मातृवत् परदारेषु' पर स्‍त्री को अपनी माँ के बराबर समझे। लड़का मुर्ख था कहने लगा। तो क्‍या पिता जी आप मेरी स्‍त्री को माता के तुल्‍य समझते हैं? पिता रुष्ट हो ...
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