दिल की आवाज

मनीषा गौतम

दिल की आवाज
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सारांश

जज के प्रवेश करते ही पूरा सेशन कोर्ट में शांति छा गई. जज ने केस के पन्नो को पलटा. बचाव पक्ष का वकील नही है. अशोक ने कहा मुझे जरूरत नहीं है वकील की. तो क्या आप अपने लिए जिरह खुद करेंगें?
Jivendra Pandey
बहुत खूब लिखा है आपने
दीपा
oh my god... horrible...ashok ko saja nhi ...award milna chahiye tha...or anuj...wo isi layak tha
Drshail Saxena
hamara samaj kahan Ja raha hai ?
Rekha Jain
No words to say.... 👍👍
Suresh Mandal
हैवानो को गर सरकार सजा नहीं दे सकती है तो दूसरा रास्ता यही है ।जयहिन्द ।
Manju Gupta
ese logo ki yahi saja honi chahiye
Rajwin Panesar
दिल को छू लेने वाली story. बोहत ही dynamic तरीके से पूरा कथानक आगे बढ़ता है. सब कुछ मानो आँखों के आगे साकार होता जाता hai. Keep it up सर
Soniya Soni
yhi hona chahiye tha
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