दम लबों पर था दिलेज़ार के घबराने से

अकबर इलाहाबादी

दम लबों पर था दिलेज़ार के घबराने से
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सारांश

दम लबों पर था दिलेज़ार के घबराने से आ गई है जाँ में जाँ आपके आ जाने से तेरा कूचा न छूटेगा तेरे दीवाने से उस को काबे से न मतलब है न बुतख़ाने से शेख़ नाफ़ह्म हैं करते जो नहीं क़द्र उसकी दिल फ़रिश्तों ...
Prem Prakash
बहुत अच्छे
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