तेरी यादे

शशि कुशवाहा

तेरी यादे
(41)
पाठक संख्या − 186
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सारांश

रह रह के जो याद तेरी आती है , कैसे कहूँ मुझको बड़ा सताती है। बंद करू जो आँखे सोने को मै, नींद नही फिर मुझको आती है। जरा भी निंदिया  आये तो , ख्वाब तेरे ही बस दिखलाती है। रह रह के जो याद तेरी आती ...
Vijay Kumar
बहुत ही उम्दा रचना...
आरती झा
प्रेममयी मनभावन रचना
sakshi Shivhare
very nice.. 💓 touching
SHAILENDRA DUBEY
बहुत ही सुंदर प्रेम के अनुभूतियों से सराबोर रचना।हृदय के आंगन में जब प्रीत अठखेलियाँ करे तो मन प्रेममयी हो ही जाता है।बहुत ही सुंदर!!!!💐💐💐💐💐👌👌👌
Poonam Kaparwan
ye dill v naa bahhott khoob h pyr v krta h kisi ko dil mh rakhta h or raato ke neend gaavaa deta h jalim dill ke tutne ki khana kisi ko sun nai nahi dyte .gajab chuann .
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Manisha
वाह,..... बहुत सुंदर अहसास
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शिवानी शांतिनिकेतन
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
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