तेरी यादे

शशि कुशवाहा

तेरी यादे
(56)
पाठक संख्या − 263
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सारांश

रह रह के जो याद तेरी आती है , कैसे कहूँ मुझको बड़ा सताती है। बंद करू जो आँखे सोने को मै, नींद नही फिर मुझको आती है। जरा भी निंदिया  आये तो , ख्वाब तेरे ही बस दिखलाती है। रह रह के जो याद तेरी आती ...
Padmini saini
प्यार में मन बावरा हो जाता है ,,,,,,कभी खुद ही हसना ओर कभी खुद ही रोना आ जाता है ।। बहोत सुन्दर रचना प्यार में भीगी ओर प्यार में ही डूबी ।
sakshi Shivhare
very nice.. 💓 touching
Happy Khichi
fantastic ✍️👌
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Shaline Gupta
सुन्दर कविता👍👍👌👌💐💐😊😊
शिवानी शांतिनिकेतन
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
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शशांक शेखर
वाह शशि जी वाह
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Neha Khare
बेहद उम्दा रचना मैम 👌👌👌🙏
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