तू नहीं और सही , और नहीं और सही

अन्नदा पाटनी

तू नहीं और सही , और नहीं और सही
(139)
पाठक संख्या − 8707
पढ़िए

सारांश

छत पर खड़ी थी । इधर उधर नज़र दौड़ाई तो देखा । बाज़ू वाली छत पर एक लड़की खड़ी किसी को हाथ से कुछ इशारा कर रही थी । उत्सुकता हुई कि देखूँ कौन है जिसको इशारा कर रही है । ओह , तो यह बात थी , सामने की ...
Rekha Jain
बहुत खूब ....आज के दिल फेंक मजनुओं की हक़ीक़त बयां करती है आपकी कहानी ....
रिप्लाय
Usha Garg
बढ़िया मजनू का ये ही हश्र होना चाहिए
रिप्लाय
DrNeelam Singh
nice story
रिप्लाय
Ashwini Tiwari
bhot bdhiya likha h or bahot sahi kiya un ladkiyo ne
रिप्लाय
Poornika Sharma
nice one
रिप्लाय
उत्तम कुमार
Bahute badhiya
रिप्लाय
heena
mst
रिप्लाय
Imran Khokhar
It's amazing
रिप्लाय
PriYanKa Pankhi
mast story ... visit my profile
रिप्लाय
Sandeep Sing
good
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.