तुम भी चलो, हम भी चलें, चलती रहे ज़िंदगी

अन्नदा पाटनी

तुम भी चलो, हम भी चलें, चलती रहे ज़िंदगी
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सारांश

तन्वी थकी होने के कारण सोफ़े पर पसरी हुई थी । झपकी भी आ रही थी । तभी मोबाइल घूं घूं करने लगा । बिल्कुल भी बात करने का मूड नहीं था । पर देखा कि बाबूजी का फ़ोन है तो तपाक से उठा लिया । उधर से बाबूजी ने ...
Nitish Rai
जबरदस्त लेखक
Uma Dhamija
very nice story
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ravinder agarwal
बहुत खूब, क्या कही आपने। आज के दौर का सच भी यही है। हम सब भूक चुके है। शानदार।
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Mickenzy Titus
काश सबकी सोच ऐसी होती
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Pramila Joshi
बहुत सही कहानी
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Manoj Shukla
Very nice Story
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ajeetsingh
बहुत अच्छी है
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Manisha Raghav
अति उत्तम
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