तुम्हारी याद

शशि पाण्डेय

तुम्हारी याद
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सारांश

तुम्हारी याद हाँ कभी कभी इतनी तुम्हारी याद जैसे ठंड में गुनगुनी धूप का गुनगुना अहसास तुम्हारी याद हाँ कभी कभी इतनी तुम्हारी याद जैसे रेगिस्तानी सहरा में पानी से लबालब झील तुम्हारी याद हाँ कभी कभी ...
Gaurav Shukla
बहुत ही सुंदर रचना है।
Ravindra N.Pahalwam
याद पर कोई नियंत्रण नहीं / कल्पना के प्रतीक श्रेष्ठ हैं / कलम को प्रणाम...
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