तिलिस्म

उपासना सियाग

तिलिस्म
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सारांश

तभी अचानक उसके सर पर से बारिश गिरना बंद हुई तो वह चौंक पड़ी और जल्दी से मुड़ी तो एक नौजवान उसके सर पर छाता किये हुए था। सुमि सहम सी गयी।युवक मुस्कुराते हुए बोला ,"मैं भी किसी टैक्सी का इंतजार कर रहा हूँ। आपको भीगते और किताबें सहेजते देखा तो मुझसे रहा नहीं गया। " सुमि की जुबान जैसे तालू के ही चिपक गयी थी और उसके दिमाग में एक बिजली सी कौंध गयी कि कहीं ये उसका राजकुमार तो नहीं ! और धीरे से बोल पड़ी "राज कुमार ! " युवक हंस कर बोला , " जी नहीं ,मेरा नाम लक्ष्य वीर सिंह है। " पर सुमि तो जैसे वहां थी ही नहीं और बस उसकी आँखों में ही देखती रही। लक्ष्य स्मित मुस्कान के साथ बोला , "तुम बहुत खूबसूरत हो और ये तुमने जो हल्का आसमानी रंग पहना है, वो तुम पर बहुत खिल रहा है !". फिर उसके कंधे पर तर्जनी से ठक- ठक कर बोला " आपकी टैक्सी आ गयी !!जाइए ...! "
NARENDRA CHAUHAN
Bahot hi, sundar Bahot hi badhiya dil ko chhu gaya...............
pankaj sharma
उत्तम प्रस्तुति।
Sangita Agrawal
भावपूर्ण,वास्तविक रचना
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