तिलकधारी

Sneh Bharti

तिलकधारी
(20)
पाठक संख्या − 72
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सारांश

उसके बैंक में आते ही सुगबुगाहट शुरू हो जाती थी । सभी बैंक कर्मी एक दूसरे की ओर देखते, मुस्कराते । सभी की प्रतिक्रिया भले ही अलग अलग होती लेकिन एक बात सभी के मन में साँझी होती थी कि अब प्रसाद रूप में ...
Sudhir Kumar Sharma
दोहरा चरित्र
Mohit singh bhadoriya
अनुपम रचना, सच लिखनी की तागत सबमें नही होती। पर आप में है साधूवाद
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डॉ.गीता यादवेन्दु
बहुत अच्छी रचना सर । कुछ-कुछ आँखे खोलती हुई ।
अनीता स्नेहबंधन
बहुत सुन्दर प्रस्तुति आप की
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ਮਨਦੀਪ ਗਿੱਲ
Bahut acha likhiya hai ji
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डॉ. पूनम बनर्जी
tilakdhari hokar sabse bada thag..achchi sikh di manager ne usey
Meera Sajwan
आज का कट्टु सत्य।
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लेखा चौधरी
बहुत खूब सर , बहुत ज्यादा अच्छी चीजें अक्सर भरम निकलती हैं ।
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