ताला- चाबी

प्रज्ञा"अस्मि" अग्रवाल

ताला- चाबी
(19)
पाठक संख्या − 594
पढ़िए
Laxminarayan Kedia
एक दर्द भरा अनुभव ? दिल को छू जाता है। खास कर जब निजी हो
सुमना भट्टाचार्जी
अच्छी लगी |
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Meena Shah
POchh KAR ashq APNI aankho SE muskurao to vaat bane
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yasmeen
ताला चाबी
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मंजू महिमा
कहानी अच्छी है । इसमे एक नयापन है ।
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Vinod Juneja
awesome apratim
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Agam Kulshrestha
Superb
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prashant Singh
कविता अगर सिर्फ कविता है तो बेहतरीन है पर गर ये सोच है या एहसास हैं , तो इनमे बदलाव जरुरी है... चाभी का अस्तित्व नही खो जाता ताले से बिछड़कर , master key होती है किसी भी ताले को खोल सकती है पल भर में चूर चूर कर सकती है उसका गुमान रचना के लिए बहुत बधाईयाँ
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rachna
चित्र को सही रूप दे रही है कविता । beautiful
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