ताकत एक स्त्री की #ओवुमनिया

प्रणिता .माया आनंद टेम्भुर्णे

ताकत एक स्त्री की #ओवुमनिया
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सारांश

माँ के पैरो से जमीं खिसक गयी ,उसने खुद को संभालते हुए , बेटी का हाथ एक हाथ में और एक हाथ में लिया कुदाल लेकर सीधे स्कूल में पहोची .बेटी से टीचर की पहचान कराई और कॉलर पकड़ कर घसीटते हुए स्कूल के बाहर लेकर आयी और सबके सामने अपनी ताक़त का परिचय दिया
Sapna Sharma
sahi m orat apni takat ko jb tak pahchan nhi pati jb hi sahti hai
Jagdish Tribhoovanbhai Joshi
इस सामाजिक समस्या समाज अक्सर फैला हुआ होता हैं और इसे सबके सामने बहुत जरूरी था जो कखूबी किया गया हैं
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Loveleena Sharma
good.... nari ko kabhi bhi kam na samjhe ye purush. agar ye luxmi ka roop hai to waqt ane par durga bhi ban sakti hai
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