तरसती निगाहें

गौरव कुमार

तरसती निगाहें
(39)
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सारांश

यही साश्वत सत्य है कि एक माता-पिता अनेक बच्चों को पाल लेते हैं लेकिन अनेक बच्चे मिलकर भी एक माता -पिता को नहीं पाल पाते ।चच्चा के प्राण पखेरू भले ही उड़ चुके थे परंतु उनकी पथरायी आँखें अब भी बेटे का इंतजार कर रही थीं।
Chhavi Sharma
कडवा सच
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mukesh nagar
बेहतरीन लेखन गौरव....बनरसी शैली तजबीज लिए हम😊 भाई, बहुतै बढियाँ लगा..
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Durgeshwari Sharma
शानदार...बधाइयां
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shobhana tarun saxena
benign 👌
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Usha Garg
ऐसे दिन किसी को न दिखये
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Manish Kumar
very good.
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राजेश मंथन
कलयुग में माँ बाप को सपूत श्रवण कुमार जैसे बेटे बड़ी मुश्किल से नसीब होते हैं। यह तो समाज की कड़वी सच्चाई है। आपकी कहानी मार्मिक है। बधाई गौरव कुमार जी ।
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Neeti Pandey
nice story
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Kushbu Sharma
aaj ki kahani
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Reema Bhadauria
Nice 😊😊
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