तरसती निगाहें

Gaurav Kumar 'वशिष्ठ'

तरसती निगाहें
(51)
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सारांश

यही साश्वत सत्य है कि एक माता-पिता अनेक बच्चों को पाल लेते हैं लेकिन अनेक बच्चे मिलकर भी एक माता -पिता को नहीं पाल पाते ।चच्चा के प्राण पखेरू भले ही उड़ चुके थे परंतु उनकी पथरायी आँखें अब भी बेटे का इंतजार कर रही थीं।
शोभा शर्मा
जीवन की सच्चाई बयान करने वाली मर्मस्पर्शी कहानी
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Jitendra Pandey
nice
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Asmi Srivastava
sahi baat h...
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Chhaya Singh
😢😢 aaj ka shaswat satya
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पिंकी राजपूत
उफ्फ!! कटु सत्य...
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अभिषेक हाड़ा
esi kahaniya padh kar me sochta hu, kya yahi din dekhne ke liye mata pita apni santan ki parvarish karte hai.
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Radhika Khanna
nice story shri krishna ne isliye es yug ko kalyug kaha hai
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Anil Gangwar
जीवन की सच्चाई
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Chhavi Sharma
कडवा सच
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mukesh nagar
बेहतरीन लेखन गौरव....बनरसी शैली तजबीज लिए हम😊 भाई, बहुतै बढियाँ लगा..
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