तन मछरी-मन नीर

विवेक मिश्र

तन मछरी-मन नीर
(279)
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सारांश

हवेली को फूलों से सजते हुए देखकर उसने चश्मा उतारा और उसे रुमाल से ऐसे पौंछने लगी मानो समय पर जमी धूल छुटा रही हो। आज वह फूलों से एक पुरानी हवेली सजवा रही थी। समय कितना बदल गया था, पर लगता था जैसे कल ...
RASHMI KUMARI
awesome, no words.....
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Sandhya Singh Verma
बहुत ही सुन्दर हृदयस्पर्शी एक प्रेम कथा जिसे पढ़ते हुए प्रवीण आँखों में से भी झर -झर लोर बहने लगे। आपके शब्दों में जादू है । कमाल का लेखन।
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Rekha Verma
bahot sunder
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Rashmi Pathak
प्रारम्भ से अंत तक मन को बांध कर रखने वाली कहानी.
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Abhishek Kejriwal
nice book
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Rahul Tiwari
उम्दा लेखक की कलम से निकली बकवास कहानी दो मिनट बाद ही पता चल गया यह प्रेमी के साथ भाग जाएगी आप से अच्छी कहानी की अपेक्षा होती है । हिंदी फिल्मों की तरह सबका एक ही अंत नहीं होना चाहिए ।
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sudha tiwari
बहुत अच्छी रचना
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Geeta Ved
bahut shandar rachna
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