ढाई बजे की बस

नीतू सिंह 'रेणुका'

ढाई बजे की बस
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सारांश

इतनी रात का सफर किसे अच्छा लगता है भला? मगर क्या किया जाए? वहाँ के लिए बस ही रात को दो बजे के बाद मिलती है। वह भी इस शहर से नहीं बल्कि दूसरे शहर जाकर। यह तो वैसे भी कोई शहर नहीं है, कस्बा है कस्बा। ...
karan chauhan
कहानी सच मे डरावनी है...
Asif Ali
kuch khash nahi hai
Pradip Sinha
mazedar story...😊😊😊
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