डर से भी बड़ा..डर

चंद्रमौली पाण्डेय

डर से भी बड़ा..डर
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सारांश

खड़ खड़--खड़ खड़..ट्रेन द्रुत गति से भागी चली जा रही थी।संध्या काल का समय था। तेज बारिश और बीच बीच मे बिजली की चमक वातानुकूलित कोच की खिड़कियों से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही थी।केबिन का एकांत और यह भयावह ...
Mayank Bajpai
it qas very small story.. but good one.
Archana Kumari
kahani sach me thori drawani hai
Versha Dubey
वाकई कहानी बहुत ही दिलचस्प है अब जब भी ट्रेन से यात्रा होगी आपकी ये कहानी जरूर याद आयेगी
Amit Mishra
विश्वास था भूतों पर तो भी डरा गया अभी कह देते की विश्वास नही तो भी डरा देता
Mithlesh Shrivastava
अधूरी कहानी, और आगे लिखना चाहिए था।
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