डर के आगे मौत है

कुलदीप सिंह हुडडा

डर के आगे मौत है
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पाठक संख्या − 3418
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सारांश

डर सदा से इन्सान का पीछा करता रहा है..सदियां बीत जाने पर भी यह अलग अलग तरह से अपना रूप दिखाता रहा है..  यह छोटी सी कहानी भी डर और रोमांच का मिश्रण है..जिसे कई बार मैंने मेरे गाँव के अनेक बुजुर्गों ...
Krishna Siddharth
very sad
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Uday Veer
well well well Kabil'e tarif
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Dr Ravi Shankar Singh
गांव की याद ताजा हो गयी
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Amit Mishra
कहानी बढ़िया थी लेकिन बेचारे को मार दिया आपने ।।काश अंत थोड़ा सुखद होता
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Ankit Maharshi
मैं इन कहानियों को चौपाल कहानियां कहता हूं। गांव के चौपालों पर अक्सर ऐसी कहानियां जिसमे किसी दिलेर ने भूत या शैतान का मुकाबला किया हो...सुनने को मिलती है। शहरी लोग अपरिचित है। अच्छा लगा आपकी कहानी ने कुछ पुरानी यादें ताज़ा कर दी।
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Sachin dhangar
nice story Sir
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Mamta Upadhyay
अद्भुत👌👌
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Mahesh Sharma
keep going nice story
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सोनम त्रिवेदी
ऐसी और इससे मिलती जुलती कहानियों को माने भी सुना है पर इतने detail में कभी नहीं। बूढ़े बुजुर्ग बढ़ा चढ़ा के खूब सुनाते हैं खैर कहानी अच्छी थी
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Sandhya Rajput
Nice
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