डरावनी रात

अरुण गौड़

डरावनी रात
(424)
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सारांश

रात पूरी तरह से चादर पसार चुकी थी, सर्दी का मौसम बस आहट ही दे रहा था, छोटे मोटे आवारा से बादलो को छोड दिया जाये तो आसमान बिल्कुल साफ था। चंदर ग्राहकों से बात करता हुआ फिरायवन घुमा कर चाय पका रहा था। वैसे तो चंदर थोडा डरपोक किस्म का आदमी था लेकिन थोडी देर पहले ही उसने एक शराबी के साथ देशी पव्वे मे पार्टनरशीप की थी, दो पैक उसके अंदर थे इसलिये वह ग्राहकों के सामने अपनी बहादुरी और हिम्मत को लेकर खूब लम्बी-लम्बी फेक रहा था..................
Shikha Gupta
superb
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Shia Shyam
Nice
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Prashant Mishra
कहानी तो पुरानी टाइप है, पर लिखने का तरीका इतना बढिया है कि मजा आ गया
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hemant bavaria
भाई आप ने कहानी को बहुत ही प्यारा रूप दिया है लेकिन इसका अंत कुछ और होना चाहिए था मुझे इसके अगले भाग का इंतजार रहेगा धन्यवाद
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Harshit pandey Pandey
इतनी भी अच्छी नहीं है ठीक ठाक ही है
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MOHAMMAD AFJAL
☺️☺️☺️
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Meena Singh
bahut badhiya
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NAZISH PARWEEN
very nice story 👌 superb
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Kavita Chaudhary
kahani achchhi lgi sir .
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k n tripathi
very nice
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