डर;एक दास्ताँ ,हर मोड़ पर हमेशा।

Abhishek Chaubey

डर;एक दास्ताँ ,हर मोड़ पर हमेशा।
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सारांश

अनिमेष को सामने हॉर्स चेयर दिखती है ,वो उसके करीब जाता है,तो वह चेयर भी उसकी और बढ़ती है,पहले अनिमेष वहम समझता है ,फिर वह अपने दो कदम और बढाता है, फिर से चेयर चलती है।
Syed heena Zaidi
samjh nhi aya es m dar kaha tha
Sumit Singh
dusra part bhi likho
Local Boy company
choti magar maan mohak kahani
Shiv Ram Bajpai
can be written on completion of the storey
Hina Kureshi
Abhi tak to achi hai
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Angel Bhatiya
Nice
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Karmvir Kumar
good
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