झूठी हैं दीवारें

मंजू सिंह

झूठी हैं दीवारें
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सारांश

दो बेटियों के पिता नरेश अपनी बेटियों को जान से ज़्यादा स्नेह करते थे पति पत्नी दोनों ने कभी अपनी बेटियों को बेटों से कम नहीं समझा . न ही कभी उन्हें बेटे की कमी खली हर प्रकार की सुख सुविधा से संपन्न एक मध्यम वर्गीय परिवार था उनका . जवान बेटियों के माता -पिता का जीवन तलवार की धार पर टिका रहता है इन दिनों..अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दिए थे उन्होंने किन्तु बेटियां सुंदर थीं और बस यही उनकी दिन रात की चिंता का कारण था वे बस इतना चाहते थे कि पढ़ा लिखा कर बेटियों को लायक बना दें और वो इज़्ज़त से अपने घर चली जाएँ .
Amit Yadav
समाज की हद कभी नहीं तोड़ना चाहिए। अपवाद वाले रिश्ते कभी मिल जाते है इसका मतलब ये नही की लव मैरिज सही है
Mamta Upadhyay
बहुत ही सुंदर और प्यारी स्टोरी
Archana Varshney
बहुत बढ़िया
Jugraj Dhamija JD
बहुत सुंदर कहानी। एक बात बुरी लगी कि शादी में अपने लड़के के परिवार वालों को दहेज लोभी ओर उन्हें ही गलत बताया। जबकि आपने रचना या उसकी बहन के घर के कार्य करने के बारे में कुछ नही लिखा। आज की आधुनिक लड़कियों को माता पिता पढ़ा तो रहे है पर घर के कार्य और संस्कार नही दे रहे। लड़का डॉक्टर चाहिए तो बेटी भी डॉक्टर होनी चाहिए। बराबरी की शादी करनी दोनो परिवारों के लिए बेहतर होती है। अभी एक विद्यार्थी तथा अमीर घर के लड़के से रिश्ता कर दिया, कल को वो कारोबार में कामयाब नही होता या रचना परिवार में एडजस्ट नही कर पाती तो यही लड़का निठल्ला और परिवार दहेज लोभी हो जाएगा। बाकी कहानी बहुत खूबसूरत ओर प्रेरणादायक है। कहानी के लिए साधुवाद।
shalini gulati
heart touching story......
कोमल राजपूत
such a amazing and heart touching story
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