जौहर

आकाश इफेक्ट

जौहर
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सारांश

दिसम्बर शुरू हो चुका था। खेतों से ईख कट चुकी थी या कट रही थी। इधर-उधर ईख का जलावन झुंड के झुंड रूप में बिखरा पड़ा था। रात्रि अपने चरम पर थी। यदा-कदा कुत्ते और सियारों की आवाज से गांव गूंज उठता था या ...
Aaradhya Av
अच्छी सी रचना,,,मन को भा गई
सुमित मेनारिया
बेहद खूबसूरत लेखन हैं आपका। आपने काफी अच्छे तरीके ज़ोहर को वर्तमान परिपेक्ष में व्यक्त किया हैं। मुगलो से रक्षा करते हुए आग में कूदना मात्र ही ज़ोहर नही हैं बल्कि अपनी इज़्ज़त की रक्षा हेतु स्वयं का बलिदान भी ज़ोहर ही हैं। आपका शब्द चयन एवं प्रस्तुतिकरण प्रशंसनीय हैं। लिखते रहिये।
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Mridula Kunj
कहानी की विषयवस्तु न्य नहीं किन्तु प्रस्तुति का तरीका और भाषा प्रयोग बहुत ही बढ़िया।सब कुछ सामने घटित होता हुआ प्रतीत होता है।
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Ashish
Good
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Archana Varshney
अच्छी
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vibha
khud pr sharm BHI Nahi aati hai inhe
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Karishma
superb...
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Bhagvandas Khandelwal
kya baat h umada or ekhactiv
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Devendra Dev
अंदाज-ए-बयां अच्छा लगा ।
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