जो तुम न मिलते

डॉ अर्चना शर्मा

जो तुम न मिलते
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सारांश

" दोनों बहुओं के लिए ये अंगूठियां ठीक रहेंगी।"उसने सोचा। पचास वर्ष की संध्या।दो इंजीनियर बेटों की माँ।एक कुशल मध्यमवर्गीय गृहणी की तरह अपनी भावी बहुओं के लिए गहनों की खरीदारी कर रही थी।लौकिक दृष्टि ...
Sadaf Firoz
behad khubsurat
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Suman Barnwal
very nice
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Sharda Rawat
very nice
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alka
bhot khoob mam
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ब्रजेंद्रनाथ मिश्रा
आदरणीया डा अर्चना शर्मा जी, आपने जीवन के जन्जाल के बीच मलिन होती मन की अन्तरुनी परतों में बसे आत्मीय भावों को बहुत ही मर्यादित ढंग से अभिब्यक्त किया है। बहुत बहुत साधुवाद! आप इसी साइट पर मेरी रचनायें भी पढ़ें और अपने विचार दें। कृपया मेरा यह संदेश अवश्य पढ़ें: मेरी लिखी दूसरी पुस्तक उपन्यास के रूप में "डिवाइडर पर कॉलेज जंक्शन" के नाम से हिंद युग्म से प्रकाशित हो चुकी है। अभी यह आमज़ोन के साइट से ऑन लाईन मात्र 86रु में मँगाई जा सकती है। इस लिंक पर जाकर मंगाएं: link: http://amzn.to/2Ddrwm1 आमज़ोन पर customer review लिखें और मेरी लिखी पुस्तक "छाँव का सुख" डाक द्वारा मुफ्त प्राप्त करें। इसतरह आप उपन्यास "डिवाइडर पर कॉलेज जंक्शन" आपको मुफ्त प्राप्त हो जायेगी और मुझे एक प्रबुद्ध साहित्यानुरागी से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हो जायेगा। अगर आपको ऐमेज़ॉन पर ओर्डर करने में दिक्कत हो तो अपना मोबाइल नम्बर और पता मेरे मेल आई डी ( नीचे लिखा है) पर भेज दे। पुस्तक आपके पते पर पहुंच जायेगी। पुस्तक का मूल्य पुस्तक मिल जाने पर दें। साथ ही मैं आपके पते पर अपनी एक और पुस्तक "छाँव का सुख" (कहानी संग्रह, मूल्य 100रु), डाक द्वारा मुफ्त भेज दूंगा। अब क्या इन्तजार करना! मेरा ई मेल : brajendra.nath.mishra@gmail.com पर भेज दें। आप यूट्यूब के मेरे channel : marmagya net पर जाकर मेरी रचनाओं के ओडियो और वीडियो को देखें, लाइक करें और subscribe भी करें। Facebook link: https://m.facebook.com/public/Brajendranath-Mishra Twitter link: Take a look at BRAJENDRA NATH MISHR (@bnmish): https://twitter.com/bnmish?s=09 मेरे ब्लॉग का लिन्क: https://marmagyanet.blogspot.com सादर आभार! ब्रजेन्द्रनाथ
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Damini
सुन्दर रचना है बधाई हो आपको
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Pramod Ranjan Kukreti
बहुत अच्छा लिखा है । हां, अपने लिये जीना कोई भी सीखा सकता है, कहीं भी कभी भी । सामाजिक बोध को भी बचाये रखा, बहुत सुंदर अंत दिया कहानी को । बधाई।
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Krishna Raj
Behad shandar. Aisa lga kuch kuch meri ho....
Vandana Rastogi
हवा के शीतल झोंके जैसी एक मर्यादित कहानी ।अच्छी है।बधाई ।
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