जो ख्वाब जल गये।

सुनील आकाश

जो ख्वाब जल गये।
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सारांश

कितने हसीनतर थे जो ख्वाब जल गये। क्या आग लगी सारे गुलाब जल गये ॥1॥ कैसी चली बयार कि सब कुछ झुलस गया। दरिया मॆ सारी मछली-मुर्गाब जल गये॥2॥ कहना ना चाहिये मगर कहने दीजिये। कुछ लोगों के तो परचमे-आदाब जल ...
Bala
nice
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AKHIL CHAUDHARI
bahut achha hai
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prateek singh
बहुत सुंदर है
Rakesh Choudhary
अतिसुन्दर पंक्तियाँ
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अनिल कुमार
शानदार 👌👍
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Sk kumar
बहुत खूब
Rakesh kalwa
Nice sir
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Vaishali Nagjyoti Nagjyoti
gjb very very nice ✌
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