जुदाई

Akela musafir ...🚶

जुदाई
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सारांश

मिल कर  किनारे से नदी केहती है अब हमे जाना होगा.... . किनारा कहता है ये कैसे होगा. मिल कर यू ना छोडो हमे . नदी ने कह .. नापना कभी गहराई को पता चल जायेगा... अलविदा तो कह दिया पर पुछना दिल से ...
Sneha
एक खुबसूरत रचना
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